WAQT

Shikaayat thi is tez raftaar waqt se, Kaise kab guzar jaata, andaaza hi na ho

नन्ही परी!

वो नन्ही परी जब आयी हमारे द्वार,अपनी प्यारी किलकारियों से उसने घर दिया सवार,देकर औदा
Autumn

पतझड़।

सुन पतझड़, क्यों अपने इस हाल पे उदास है,तेरे झड़ने से ही तो सुनहरे कल

रिश्तें!

क्यों हम रिश्तों को इतना मोल देते है,उनको उम्मीदों और आशाओं में तोल देते है,ऐ

मेहफ़िल

इस भरी मेहफ़िल मैं भी तन्हाई का आलम है,ये उनके ना होने से है, कुछ

वरदान!

उनसे मेरा सवेरा , उनसे ही मेरी सांज ,उनसे ही है आज मेरी ये पहचान

जज़्बात!

ज़ुबा पे थे जज़्बात पर बयान न कर पाए,कम्बख्त इन आँखों ने उन्हें, आईने की

कश्मकश!

मुस्कराहट में दबी वो झिझक न देखि किसीने,सहमे हुए कदमो का हाल न देखा किसीने,घबराते