बेपरवाह

जिए तो जिए यु , जिए तू बेपरवाह ,रोज़ की भगदड़ मैं , मुस्कुराये तू

बातें.

कुछ तुमने कहा , कुछ हमने कहा ,कहते कहते बातों का कारवां बनता गया ,शाम

बस एक पल

वो बारिश कुछ ऐसी हुई,दो दिल एक अनजान राह पर कुछ यु मिले,उस एक छतरी

एक छींक ऐसी.

ख्वाइशों को पूरा करने मैं मसरूफ थे इतने, महरूम रह गएँ थे छोटी खुशियों के