Poetry

कश्मकश!

मुस्कराहट में दबी वो झिझक न देखि किसीने,सहमे हुए कदमो का हाल न

बातें.

कुछ तुमने कहा , कुछ हमने कहा ,कहते कहते बातों का कारवां बनता

एक छींक ऐसी.

ख्वाइशों को पूरा करने मैं मसरूफ थे इतने, महरूम रह गएँ थे छोटी

YAADEIN

Kambakth ye yaadein, Kabhie hasati hai, kabhie rulati hai, Har pal apne hone