Poetry मुस्कान! May 27, 2020 Muskaan वो जो होटों पर आए, मगर ठहर न पाए,चेहरे के नूर को रोशन कर जाए,उसके आते ही ये मन खिल सा जाए,छुपी हुई उदासी फुर्र से उड़ जाए,जब आए तो कोई उसे रोक न पाए,औरो को भी ये उतनी ही भाए,ऐ मुस्कान,तू ऐसी बहार लाये! -शिखा जैन Best medicine, Poem, Poetry, Positivity, SJ, Smile, Thoughts 1 Like1 min read702 Views Previous post Be You! Next post मिया महोतरमा! Leave a reply Cancel reply Δ