मुस्कान!

मुस्कान!

Muskaan

वो जो होटों पर आए, मगर ठहर न पाए,
चेहरे के नूर को रोशन कर जाए,
उसके आते ही ये मन खिल सा जाए,
छुपी हुई उदासी फुर्र से उड़ जाए,
जब आए तो कोई उसे रोक न पाए,
औरो को भी ये उतनी ही भाए,
ऐ मुस्कान,
तू ऐसी बहार लाये!

-शिखा जैन