Tag: Rishtey

अधूरा राबता!

बिता वक़्त याद आता है,कभी तुम तो कभी तुम्हारा ज़िक्र इस दिल को

रिश्तें!

क्यों हम रिश्तों को इतना मोल देते है,उनको उम्मीदों और आशाओं में तोल