जज़्बात!

जज़्बात!

Jazbaat

ज़ुबा पे थे जज़्बात पर बयान न कर पाए,
कम्बख्त इन आँखों ने उन्हें, आईने की तरह सब साफ़ दर्शा दिया!

-शिखा जैन