मन बावरा!

मन बावरा!

Mann Bawaraa

बावरा सा ये मन, कही ठहरता ही नहीं ,

भवरे की तरह मंडराए हर कही ,

भावनाओ से अनजान ये मन सोच बैठा ,

ऐसी ही होती है ज़िन्दगी ,

मगर प्यार के एहसास ने कुछ ,

निराले ही सच से वाकिफ कराया ,

महसूस करवाया के ,

कभी कभी स्तीर्था का नाम भी ,

होती है ये ज़िन्दगी !

-शिखा जैन